
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि टी ट्वेंटी विश्व कप दो हजार छब्बीस से बाहर हुई टीमों के साथ समान व्यवहार नहीं किया गया।
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण पश्चिम एशिया का हवाई क्षेत्र कुछ समय के लिए बंद हो गया था। इसी वजह से टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी कई टीमें अपने देश वापस नहीं जा पा रही थीं।
वेस्ट इंडीज टीम ने अपना आखिरी मैच एक मार्च को कोलकाता में खेला था और तब से वह भारत में ही रुकी हुई थी। इसके बाद चार मार्च को दक्षिण अफ्रीका टूर्नामेंट से बाहर हुई और पांच मार्च को इंग्लैंड की टीम भी बाहर हो गई।
लेकिन इन तीनों टीमों में सबसे पहले भारत से रवाना होने वाली टीम इंग्लैंड रही।
चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था
हाल ही में जानकारी सामने आई कि आईसीसी ने इन तीनों टीमों के लिए चार्टर फ्लाइट की व्यवस्था की है। इंग्लैंड की टीम मुंबई से शाम के समय लंदन के लिए रवाना हो गई।
वहीं वेस्ट इंडीज और दक्षिण अफ्रीका की टीमों को एक साथ आठ मार्च को रवाना किया जाएगा। यह चार्टर फ्लाइट पहले जोहान्सबर्ग जाएगी और उसके बाद एंटीगुआ पहुंचेगी।
माइकल वॉन ने उठाए सवाल
माइकल वॉन को यह फैसला उचित नहीं लगा। उन्होंने आईसीसी की आलोचना करते हुए कहा कि सभी टीमों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए था।
वॉन का मानना है कि इंग्लैंड को पहले भेजा गया क्योंकि इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड का प्रभाव आईसीसी में क्रिकेट साउथ अफ्रीका और क्रिकेट वेस्ट इंडीज की तुलना में ज्यादा है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में सभी टीमों के साथ बराबर व्यवहार होना चाहिए। केवल इसलिए कि किसी बोर्ड का आईसीसी में ज्यादा प्रभाव है, उसे प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए।
घटनाक्रम का सार
| टीम | टूर्नामेंट से बाहर होने की तारीख | वापसी की स्थिति |
|---|---|---|
| वेस्ट इंडीज | एक मार्च | आठ मार्च को रवाना |
| दक्षिण अफ्रीका | चार मार्च | आठ मार्च को रवाना |
| इंग्लैंड | पांच मार्च | पहले ही लंदन के लिए रवाना |
इस पूरे घटनाक्रम के बाद आईसीसी के फैसले पर बहस तेज हो गई है और कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सभी टीमों के साथ वास्तव में समान व्यवहार किया गया।
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