एम एस धोनी को दस लाख रुपये जमा करने का आदेश क्यों मिला आईपीएल सट्टेबाजी केस की पूरी जानकारी

साल दो हजार चौदह में दायर यह मामला दो हजार तेरह के आईपीएल सट्टेबाजी विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसमें कथित तौर पर एम एस धोनी का नाम जोड़ा गया था। मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि यह मामला पिछले बारह वर्षों से लंबित है, क्योंकि इसमें कई अंतरिम याचिकाएं और अवमानना से जुड़े मुद्दे सामने आते रहे हैं।
न्यायमूर्ति आर एन मंजुला ने यह आदेश उस समय दिया, जब अदालत के समक्ष प्रस्तुत सामग्री में कई कॉम्पैक्ट डिस्क शामिल थीं। इन डिस्क में मौजूद सामग्री को लिखित रूप में उतारना और फिर उसका अनुवाद करना आवश्यक है।
दस लाख रुपये जमा करने का कारण
उच्च न्यायालय के दुभाषिया विभाग ने अदालत को बताया कि यह कार्य काफी बड़ा है। यदि एक दुभाषिया और एक टाइपिस्ट पूरे समय इस काम में लगाए जाएं, तब भी इसे पूरा करने में लगभग तीन से चार महीने लग सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया की अनुमानित लागत दस लाख रुपये तय की गई।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह खर्च वादी पक्ष को वहन करना होगा। इसके तहत एम एस धोनी को बारह मार्च दो हजार छब्बीस तक यह राशि मुख्य न्यायाधीश राहत कोष में जमा करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने कहा कि इस भुगतान का उद्देश्य मुकदमे की सुनवाई को बिना किसी और देरी के आगे बढ़ाना है।
सौ करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा
एम एस धोनी ने यह मानहानि का मुकदमा एक सौ करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग के साथ दायर किया है। यह केस ज़ी मीडिया कॉरपोरेशन, पत्रकार सुधीर चौधरी, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी जी संपत कुमार और न्यूज़ नेशन नेटवर्क के खिलाफ दायर किया गया था।
धोनी ने अदालत का रुख तब किया था, जब कथित रूप से उनका नाम दो हजार तेरह के आईपीएल सट्टेबाजी विवाद में घसीटा गया था। न्यायालय ने कहा कि अब इस मामले को और लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए और सुनवाई को सुचारु रूप से आगे बढ़ना चाहिए।
बारह साल पुराना मुकदमा और उसके मोड़
यह मामला पिछले बारह वर्षों में कई उतार चढ़ाव देख चुका है। दोनों पक्षों द्वारा बार बार अंतरिम याचिकाएं दायर किए जाने के कारण सुनवाई में लगातार देरी होती रही।
साल दो हजार तेईस में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी जी संपत कुमार को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया था और उन्हें पंद्रह दिन की साधारण कैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, दो हजार चौबीस में सर्वोच्च न्यायालय ने इस सजा पर रोक लगा दी।
एम एस धोनी ने यह अवमानना याचिका यह कहते हुए दायर की थी कि अदालत में दाखिल कुछ दस्तावेजों में की गई टिप्पणियां न्यायिक प्रक्रिया को बदनाम करने वाली थीं। दो हजार बाईस में तत्कालीन महाधिवक्ता ने धोनी को अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी और कहा था कि वे टिप्पणियां कानूनी सीमाओं से बाहर थीं।
अगस्त दो हजार पच्चीस में न्यायमूर्ति सी वी कार्तिकेयन ने आदेश दिया कि मुकदमे की सुनवाई शुरू की जाए। धोनी की गवाही दर्ज करने के लिए एक अधिवक्ता आयुक्त की नियुक्ति की गई और यह तय किया गया कि गवाही किसी आपसी सहमति वाले स्थान पर होगी।
अदालत ने माना कि एम एस धोनी की प्रसिद्धि के कारण उन्हें उच्च न्यायालय परिसर में व्यक्तिगत रूप से बुलाने से सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
नवंबर दो हजार पच्चीस में इस आदेश के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया गया। खंडपीठ ने कहा कि यह व्यवस्था व्यावहारिक और पूरी तरह उचित है।
आईपीएल दो हजार छब्बीस में वापसी को तैयार एम एस धोनी
कानूनी लड़ाई के बीच एम एस धोनी एक बार फिर आईपीएल के लिए तैयार हैं। वह आईपीएल दो हजार छब्बीस में चेन्नई सुपर किंग्स का प्रतिनिधित्व करेंगे। फ्रेंचाइजी ने उन्हें अनकैप्ड खिलाड़ी के रूप में चार करोड़ रुपये में रिटेन किया है।
आईपीएल दो हजार पच्चीस में ऋतुराज गायकवाड़ के चोटिल होने के बाद धोनी ने एक बार फिर टीम की कप्तानी संभाली थी। हालांकि यह सीजन टीम के लिए काफी मुश्किल रहा। चेन्नई सुपर किंग्स चौदह मैचों में केवल चार जीत दर्ज कर पाई और अंक तालिका में सबसे नीचे रही।
आईपीएल दो हजार पच्चीस में एम एस धोनी का प्रदर्शन
| आंकड़ा | विवरण |
|---|---|
| मैच | तेरह |
| रन | एक सौ छियानवे |
| औसत | चौबीस दशमलव पांच शून्य |
| स्ट्राइक रेट | एक सौ पैंतीस दशमलव सत्रह |
| सर्वोच्च स्कोर | तीस नाबाद |
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अदालत में जमा किए गए डिजिटल सबूतों को लिखित रूप में उतारने और उनका अनुवाद कराने के लिए दस लाख रुपये की लागत तय की गई है। इस खर्च को वहन करने की जिम्मेदारी वादी होने के कारण एम एस धोनी पर डाली गई है।
नहीं, यह कोई जुर्माना नहीं है। यह एक प्रशासनिक खर्च है, जिसका उद्देश्य मुकदमे की सुनवाई को बिना देरी के आगे बढ़ाना है।
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