‘स्टूडियो में बैठकर बोलना आसान है’, Shardul Thakur ने कमेंटेटर्स को बनाया निशाना, बोले गेंदबाजों को नीचा दिखाना बंद करो
शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) बेशक आईपीएल (IPL) के मौजूदा सीजन में बतौर रिप्लेसमेंट खिलाड़ी आए। लेकिन उन्होनें अब तक खेले 6 मैचों के बाद इतना तो बता दिया है कि सभी टीमों ने ऑक्शन में उन पर बोली न लगाकर काफी बड़ी गलती की थी। लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के तेज गेंदबाज मोहसिन के चोटिल होने के बाद फ्रेंचाईजी का हिस्सा बने शार्दुल अब तक इस सीजन में 6 मैचों में 11 विकेट ले चुके हैं। उनकी गेंदबाजी की बदौलत टीम भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। लखनऊ फिलहाल 6 मैचों में 4 मैच जीत चुकी है। हालांकि बावजूद इसके शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) नाराज नजर आ रहे हैं। उन्होनें अपनी यह नाराजगी सभी कमेंटेटर्स पर निकाली है।
Shardul Thakur ने की गेंदबाजों की तारीफ
जैसा कि आपको बताया लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) इस सीजन में 6 मैचों में से 4 जीत चुकी है। इन मैचों में 2 मुकाबले ऐसे रहे जहां टीम ने दूसरी पारी में गेंदबाजी करते हुए मैच जीते हैं। जिसमें एक मैच मुंबई इंडियंस (MI) के खिलाफ था। जिसे टीम 12 रनों से मैच जीता था। वहीं दूसरा मैच कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ था। जिसे टीम ने सिर्फ 4 रनों से जीता था। इसी को लेकर शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) बोले..
इन जीत का श्रेय हमें जाता है। क्योंकि जिस तरह टीम के सभी गेंदबाजों ने लक्ष्य को बचाया वो भी एक बार नहीं बल्कि दो बार। इसमें हमारी तारीफ इसलिए बनती है क्योंकि इन दोनों ही मैचों में पिच बल्लेबाजी के लिए अच्छी थी। बावजूद इसके हमनें सामने वाली टीम के बल्लेबाजों को लक्ष्य का पीछा करने से रोका। इसमें एक मैच हम 12 रनों से जीते और दूसरा मैच 4 रन से जीते थे
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कमेंटेटर्स के लिए क्या बोले Shardul Thakur
इतना ही नहीं, गुजरात के खिलाफ जीत के बाद शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) ने कमेंट्री बोक्स में बैठे कमेंटेटर्स को ताने भी मारे और कहा..
एक गेंदबाज के तौर पर मेरा यही मानना है कि अभी तक हमनें इस सीजन में काफी अच्छी गेंदबाजी की है। लेकिन बावजूद इसके कई बार कमेंट्री बोक्स में बैठे कमेंटेटर आपकी आलोचना कर देते हैं। वो एक गेंदबाज को नीचा दिखाने की पूरी कोशिश करते हैं। लेकिन आपको यह समझना पड़ेगा कि क्रिकेट में आज के समय में हर मैच में 200 रन बनना काफी आम बात है। अगर फिर भी आपकी आलोचना हो रही है तो यही बोलेंगे कि एक स्टूडियों में बैठ कर बोलना काफी आसान होता है। लेकिन उन्हें यह मालूम नहीं होता कि मैच के दौरान कभी-कभी ग्राउंड और पिच की कंडीशन भी काफी अलग हो जाती है।