सौराष्ट्र ने पंजाब को 9 विकेट से हराकर विजय हज़ारे ट्रॉफी फाइनल में बनाई जगह

सौराष्ट्र ने विजय हज़ारे ट्रॉफी में अब तक की सबसे प्रभावशाली रन चेज़ में से एक का प्रदर्शन करते हुए बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में पंजाब द्वारा दिए गए 292 रन के लक्ष्य को सिर्फ़ एक विकेट गंवाकर हासिल कर लिया। इस जीत के साथ सौराष्ट्र ने रविवार को होने वाले फाइनल में विदर्भ के खिलाफ अपनी जगह पक्की कर ली और 2022–23 सत्र के बाद पहली बार खिताब जीतने की उम्मीद को ज़िंदा रखा।
यह पूरा रन चेज़ पूरी तरह से विश्वराज जडेजा के नाम रहा, जो 165 रन बनाकर नाबाद लौटे। यह इस टूर्नामेंट में उनका तीसरा लिस्ट-ए शतक था। उनकी पारी इतनी हावी रही कि दूसरी पारी के बीच में ओस का असर शुरू होने से पहले ही मुकाबला लगभग सौराष्ट्र की पकड़ में आ चुका था। उस समय तक टीम को वैसी ही शानदार शुरुआत मिल चुकी थी, जिसकी उन्हें तलाश थी।
जडेजा का दबदबा कप्तान हार्विक देसाई के साथ हुई 172 रन की विशाल ओपनिंग साझेदारी के दौरान साफ नज़र आया। जहां जडेजा आक्रामक अंदाज़ में रन बटोर रहे थे, वहीं देसाई ने संतुलित भूमिका निभाते हुए 63 गेंदों पर 64 रन बनाए और अपने साथी को खुलकर खेलने का मौका दिया। देसाई के आउट होने के बाद भी सौराष्ट्र की रफ्तार थमी नहीं। प्रेरक मांकड़ ने नाबाद अर्धशतक जमाया और टीम को 63 गेंद शेष रहते लक्ष्य तक पहुंचा दिया। जडेजा और मांकड़ के बीच दूसरे विकेट के लिए 99 गेंदों में नाबाद 121 रन की साझेदारी हुई।
हालांकि रन चेज़ की शुरुआत इतनी धमाकेदार नहीं रही थी। सौराष्ट्र ने शुरुआती चार ओवरों में सिर्फ 15 रन बनाए थे। लेकिन इसके बाद जडेजा ने पंजाब के सबसे तेज़ गेंदबाज़ गुरनूर बराड़ को निशाना बनाया और एक ही ओवर में दो चौके और एक छक्का जड़कर मैच का रुख बदल दिया। इसके बाद चौकों-छक्कों की बारिश शुरू हो गई। कृष्ण भगत के खिलाफ जडेजा खासे आक्रामक दिखे, जिन्होंने बिना कोई विकेट लिए 53 रन लुटा दिए।
पहली पारी में क्या हुआ था?
पंजाब की ओर से पारी की नींव अनमोलप्रीत सिंह ने जुझारू शतक के साथ रखी, जबकि कप्तान प्रभसिमरन सिंह ने शीर्ष क्रम में 87 रन की अहम पारी खेली। दोनों ने महज़ 84 गेंदों में शतकीय साझेदारी कर पंजाब को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहने से पंजाब अंतिम ओवरों में तेज़ रन नहीं बना सका, भले ही अंत में रामनदीप सिंह ने उपयोगी योगदान दिया।
सौराष्ट्र के गेंदबाज़ों ने लक्ष्य को काबू में रखने में अहम भूमिका निभाई। अंतिम ओवरों में चेतन सकारिया ने चार विकेट झटके, जबकि वापसी कर रहे जयदेव उनादकट ने 10 ओवर में सिर्फ 39 रन देकर कसी हुई गेंदबाज़ी की। 35वें ओवर में अंकुर पंवार की दोहरी सफलता ने भी पंजाब की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया।
फिर भी, जिस अंदाज़ में विश्वराज जडेजा उस दिन बल्लेबाज़ी कर रहे थे, ऐसा लग रहा था कि अगर पंजाब ने इससे भी बड़ा स्कोर बनाया होता, तो शायद वह भी नाकाफी साबित होता।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सौराष्ट्र ने यह मुकाबला 9 विकेट से जीता।
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