इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर माइकल वॉन ने इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड को कड़ी चुनौती दी है। उनका कहना है कि यदि द हंड्रेड टूर्नामेंट की कोई फ्रेंचाइजी राजनीतिक कारणों से आगामी नीलामी में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को चुनने से इनकार करती है, तो उस फ्रेंचाइजी को टूर्नामेंट से बाहर कर देना चाहिए। वॉन के अनुसार ऐसा परोक्ष प्रतिबंध बोर्ड के मूल्यों का मजाक उड़ाने जैसा होगा और इसका नकारात्मक असर भविष्य में ब्रिटिश पाकिस्तानी क्रिकेटरों पर भी पड़ सकता है।
पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नहीं चुनने पर माइकल वॉन ने इंग्लैंड बोर्ड से सख्त कदम उठाने को कहा
हाल ही में हुए निजीकरण के बाद द हंड्रेड की चार फ्रेंचाइजियों में भारतीय मालिकों की बहुलांश हिस्सेदारी है। यही मालिक इंडियन प्रीमियर लीग की टीमों का भी संचालन करते हैं, जहां भारत और पाकिस्तान के बीच खराब राजनीतिक संबंधों के कारण पहले से ही पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर अनौपचारिक रोक लगी हुई है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार मार्च में होने वाली नीलामी में पंजीकृत बासठ पाकिस्तानी खिलाड़ियों को भारतीय स्वामित्व वाली टीमें नजरअंदाज कर सकती हैं।
वॉन ने अपने कॉलम में लिखा कि वह द हंड्रेड के बड़े प्रशंसक हैं, लेकिन किसी भी प्रतियोगिता की विश्वसनीयता तभी बनती है जब वह सभी वर्गों के समर्थकों को आकर्षित करे। इंग्लैंड में रहने वाली बड़ी पाकिस्तानी आबादी, जो क्रिकेट से गहराई से जुड़ी हुई है, इस फैसले से खुद को अलग महसूस कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो यह इंग्लिश क्रिकेट को देश का सबसे समावेशी खेल बनाने के घोषित लक्ष्य के बिल्कुल विपरीत होगा।
वॉन का मानना है कि इंग्लैंड में क्रिकेट के भविष्य के लिए आने वाला महीना बेहद अहम है। यदि भारतीय स्वामित्व वाली फ्रेंचाइजियां किसी भी पाकिस्तानी खिलाड़ी को नहीं चुनती हैं, तो स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। ऐसे में उन्होंने बोर्ड के किसी वरिष्ठ अधिकारी से साफ और ठोस स्पष्टीकरण की मांग की है।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब मौजूदा टी ट्वेंटी विश्व कप 2026 में भारत और पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीमें एक दूसरे के खिलाफ खेल रही हैं, तो फिर विदेशी लीग में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को चुनने में समस्या क्यों हो रही है। वॉन के अनुसार जब विश्व कप में दोनों टीमें आमने सामने खेल सकती हैं, तो विदेशी लीग में खिलाड़ियों के चयन पर आपत्ति का कोई ठोस आधार नहीं बनता।
वॉन ने आगे कहा कि भले ही इंडियन प्रीमियर लीग में यह मुद्दा संवेदनशील माना जाता हो, लेकिन उसी समस्या को दूसरे देशों तक ले जाना उचित नहीं है। यदि द हंड्रेड में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर यह अनौपचारिक प्रतिबंध लागू होता है, तो यह सवाल खड़ा होगा कि वास्तव में प्रतियोगिता का नियंत्रण किसके हाथ में है। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने अतीत में इंडियन प्रीमियर लीग की कई फ्रेंचाइजियों को निलंबित किया है और कुछ को बाहर भी किया है। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या इंग्लैंड बोर्ड भविष्य में किसी फ्रेंचाइजी के खिलाफ इतना सख्त कदम उठाने की हिम्मत दिखा पाएगा या नहीं।