लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने बीसीसीआई कमेंट्री से संन्यास लिया भेदभाव के लगाए आरोप

पूर्व भारतीय क्रिकेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने बीसीसीआई के साथ अपने कमेंट्री करियर से संन्यास लेने का ऐलान किया है। उन्होंने दो दशक से अधिक समय तक अंतरराष्ट्रीय, घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में कमेंट्री की।
60 वर्षीय शिवरामकृष्णन ने सोशल मीडिया के जरिए यह फैसला साझा किया और इसके पीछे भेदभाव को एक बड़ा कारण बताया। उनके इस बयान के बाद क्रिकेट जगत में चर्चा तेज हो गई है।
भेदभाव के आरोप
शिवरामकृष्णन ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें लंबे समय तक टॉस कवरेज और मैच के बाद प्रस्तुति जैसे अहम जिम्मेदारियों से दूर रखा गया।
उन्होंने कहा कि उनकी जगह पर अक्सर रवि शास्त्री और अन्य लोगों को प्राथमिकता दी गई, जबकि नए कमेंटेटरों को भी उनसे आगे मौका दिया गया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर 23 साल तक उन्हें टॉस और प्रस्तुति के लिए नहीं चुना गया और नए लोगों को मौका मिला, तो इसके पीछे कारण क्या हो सकता है।
एक उपयोगकर्ता के जवाब में उन्होंने कहा कि यह रंगभेद का मामला है।
बयान से बढ़ी चर्चा
उन्होंने आगे कहा कि उनका यह फैसला भले ही साधारण लगे, लेकिन इसके पीछे दूरदर्शन प्रसारण से जुड़ी एक बड़ी कहानी है, जो समय के साथ सामने आएगी।
उनके इस बयान ने क्रिकेट कमेंट्री की दुनिया में काम करने के माहौल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्रिकेट करियर पर नजर
लक्ष्मण शिवरामकृष्णन का क्रिकेट करियर 1980 के दशक में शुरू हुआ था। वह भारत के एक प्रतिभाशाली लेग स्पिनर के रूप में उभरे थे।
| प्रारूप | मैच | विकेट |
|---|---|---|
| टेस्ट | 9 | 26 |
| एकदिवसीय | 16 | 15 |
उन्होंने 1983 से 1987 के बीच भारत के लिए खेला। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने तीन बार पांच विकेट लेने का कारनामा किया।
उनका पदार्पण 1983 में वेस्टइंडीज दौरे पर हुआ था और 1984 में इंग्लैंड के खिलाफ एक मैच में 12 विकेट लेकर उन्होंने खास पहचान बनाई।
कमेंट्री करियर
खेल से संन्यास लेने के बाद उन्होंने कमेंट्री की दुनिया में कदम रखा और स्पिन गेंदबाजी पर अपनी गहरी समझ के लिए जाने गए।
कई सालों तक वह क्रिकेट प्रसारण का एक अहम चेहरा बने रहे और दर्शकों के बीच उनकी खास पहचान रही।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उन्होंने भेदभाव और अवसर न मिलने को इसका कारण बताया
उन्होंने भारत के लिए 9 टेस्ट मैच खेले
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