भारतीय टेस्ट कोच बनने से जेसन गिलेस्पी का इनकार, गौतम गंभीर पर बढ़ा दबाव

पूर्व पाकिस्तान मुख्य कोच जेसन गिलेस्पी ने गुरुवार यानी एक जनवरी को इस सुझाव को साफ तौर पर खारिज कर दिया कि उन्हें भारतीय टेस्ट टीम के कोच पद के लिए आवेदन करना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज गिलेस्पी ने हाल ही में पाकिस्तान पुरुष टेस्ट टीम को लगभग आठ महीने तक कोचिंग दी थी। इसके साथ ही उन्होंने कुछ समय के लिए अंतरिम आधार पर पाकिस्तान की सीमित ओवरों की टीमों की भी जिम्मेदारी संभाली थी।
गिलेस्पी के कार्यकाल में पाकिस्तान को घरेलू मैदान पर बांग्लादेश के खिलाफ दो शून्य से हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि उसी दौरान पाकिस्तान ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज दो एक से अपने नाम की। बाद में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के साथ मतभेदों के चलते उन्होंने अपने दो साल के अनुबंध से पहले ही इस्तीफा दे दिया। इससे पहले गिलेस्पी बिग बैश लीग में एडिलेड स्ट्राइकर्स के कोच रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने यॉर्कशायर, ससेक्स, साउथ ऑस्ट्रेलिया और पापुआ न्यू गिनी की टीमों को भी कोचिंग दी है। वह आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब अब पंजाब किंग्स के गेंदबाजी कोच की भूमिका भी निभा चुके हैं।
वर्तमान में भारत के टेस्ट टीम के कोच गौतम गंभीर हैं लेकिन उन पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। वर्ष दो हजार चौबीस में कोच बनने के बाद से उन्होंने जितने टेस्ट मैच जीते हैं उससे ज्यादा गंवाए हैं। इसके अलावा उनके कार्यकाल में भारत को घरेलू मैदान पर दो बार व्हाइटवॉश का सामना करना पड़ा है जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार हुआ है।
हालिया रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट सीरीज में निराशाजनक हार के बाद बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अनौपचारिक रूप से गौतम गंभीर के पूर्व साथी वीवीएस लक्ष्मण से रेड बॉल कोचिंग की भूमिका को लेकर बातचीत की थी। हालांकि लक्ष्मण बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपनी मौजूदा जिम्मेदारी से संतुष्ट हैं और कोच पद में उनकी कोई खास दिलचस्पी नहीं है।
गौतम गंभीर का अनुबंध वर्ष दो हजार सत्ताईस के वनडे विश्व कप तक है। इसके बावजूद खासकर टेस्ट क्रिकेट में उनके भविष्य की समीक्षा आगामी टी ट्वेंटी विश्व कप के बाद की जा सकती है। हालांकि बीसीसीआई के भीतर उन्हें मजबूत समर्थन प्राप्त है और टेस्ट टीम के लिए विकल्प भी सीमित हैं लेकिन ड्रेसिंग रूम के माहौल और टीम चयन को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
भारतीय टीम का कोच बनना आसान काम नहीं माना जाता। बीसीसीआई आमतौर पर भारतीय उम्मीदवारों को ही प्राथमिकता देता रहा है। इससे पहले राहुल द्रविड़ को भी इस पद के लिए मनाना बोर्ड के लिए काफी मुश्किल रहा था। गौतम गंभीर से पहले ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज जस्टिन लैंगर ने भी इस पद में रुचि दिखाई थी। हालांकि केएल राहुल की सलाह के बाद उन्होंने पीछे हटने का फैसला किया। लैंगर ने खुद मीडिया से कहा था कि राहुल ने उन्हें बताया था कि भारतीय टीम के कोच पद में बहुत ज्यादा राजनीति और दबाव होता है।
इसी कड़ी में अब जेसन गिलेस्पी ने भी इस भूमिका से दूरी बनाकर रखने का संकेत दिया है जिससे यह साफ हो गया है कि भारतीय टीम का कोच पद विदेशी कोचों के लिए अब भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गिलेस्पी का मानना है कि भारतीय टीम का कोच पद अत्यधिक दबाव और राजनीति से भरा होता है इसलिए उन्होंने इस भूमिका में रुचि नहीं दिखाई
गौतम गंभीर के कार्यकाल में टेस्ट क्रिकेट में लगातार हार, घरेलू व्हाइटवॉश और टीम चयन को लेकर असंतोष के कारण उनके भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं
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