IPL फ्रेंचाइजी पैसा कैसे कमाती हैं: पूरी जानकारी

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) न केवल दुनिया की सबसे बड़ी और रोमांचक टी20 लीग है, बल्कि राजस्व के मामले में भी दुनिया की सबसे ताकतवर क्रिकेट लीग है इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि फोर्ब्स (Forbes) ने आईपीएल को दुनिया की सबसे मूल्यवान खेल लीगों में स्थान दिया है। आईपीएल की शख्सियत को इस बात से समझा जा सकता है कि विजेता टीम को ₹20 करोड़ की इनामी राशि दी जाती है। इतना सब सुन ने के बाद कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि आखिर आईपीएल टीमें इतनी बड़ी कमाई करती कैसे हैं। तो हम आपको बता दे आईपीएल की आय का सबसे बड़ा हिस्सा मीडिया राइट्स (प्रसारण अधिकारों) से आता है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने 2023-2027 के लिए मीडिया अधिकार को ₹48,390 करोड़ में नीलाम किए हैं। इस करार के तहत, हर फ्रेंचाइजी को कुल राजस्व का लगभग 45% हिस्सा मिलेगा। इसके अलावा, बीसीसीआई को 50% हिस्सा प्राप्त होगा और बाकी का 5% हिस्सा सारी टीमों को एक विशेष तरीके से बांट दिया जाता है। यह प्रणाली टीमों को बेहतर प्रदर्शन करने और प्लेऑफ तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करती है।
स्पॉन्सरशिप डील्स: टीमों के लिए एक प्रमुख आय स्रोत
टीमें मीडिया अधिकारों के हिस्से के साथ-साथ स्पॉन्सरशिप के भी कमाई करती है। अलग-अलग ब्रांड्स के साथ किए गए स्पॉन्सरशिप सौदों से टीमों का एक बड़ा राजस्व का हिस्सा आता हैं। वही कुछ प्रमुख खिलाड़ी इन ब्रांड्स के विज्ञापनों में नजर आते हैं, और साथ में टीम की जर्सी पर इन ब्रांड्स के नाम भी दिखाई देते हैं। जब टीमें ज्यादा लोगों तक पहुंचने में कामयाब रहती हैं तो वे बेहतर स्पॉन्सरशिप रकम हासिल कर सकती हैं।
उदाहरण के तौर पर, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB), भले ही अब तक कोई आईपीएल खिताब नहीं जीता है, लेकिन सोशल मीडिया पर उनके फॉलोअर्स बाकी टीमों से अधिक हैं। टीम में बड़े खिलाड़ियों की मौजूदगी उनके ब्रांड वैल्यू को और बढ़ा देती है। मुंबई इंडियंस (MI) और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) जैसी टीमों का प्रशंसक आधार भी काफी मजबूत है, जो उनकी कमाई में काफी बड़ी मदद करता है।
मर्चेंडाइज बिक्री: आय का माध्यम
टीमें अपने ब्रांडेड जर्सी, ट्रेनिंग गियर, कीचेन और अन्य उत्पाद जैसे मर्चेंडाइज बेचकर भी अच्छी खासी कमाई कर लेती हैं। यह प्रणाली फुटबॉल और बास्केटबॉल टीमों की तरह काफी सफल हो रही है।
घरेलू फायदा और टिकट बिक्री: एक प्रमुख आय स्रोत
टीमों की घरेलू मैदान पर अच्छे प्रदर्शन से कहीं राजस्व में ज्यादा फायदा होता है। टिकट बिक्री टीमों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा होता है। घरेलू मैच आयोजित करना टीमों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है वह कई तरह में राजस्व स्रोत खोलता है।
उदाहरण के तौर पर, महिला प्रीमियर लीग (WPL) 2024 के फाइनल के बाद, दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में पिच को तैयार करने के लिए मैदान कर्मचारियों को अतिरिक्त समय की जरूरत थी, इसके चलते दिल्ली कैपिटल्स (DC) के दो घरेलू मुकाबले विशाखापत्तनम में आयोजित किए गए थे। इस बदलाव से न केवल टीम को लॉजिस्टिक्स को चुनौती दी, बल्कि टिकट बिक्री पर भी असर डाला।
IPL 2024 ब्रांड वैल्यू रैंकिंग
| क्रम | आईपीएल टीम | ब्रांड वैल्यू (अमेरिकी डॉलर) | ब्रांड वैल्यू (भारतीय रुपये) | प्रतिशत बदलाव |
|---|---|---|---|---|
| 1 | चेन्नई सुपर किंग्स | $122 मिलियन | ₹1,010 करोड़ | 52% |
| 2 | मुंबई इंडियंस | $119 मिलियन | ₹985 करोड़ | 36% |
| 3 | रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर | $117 मिलियन | ₹970 करोड़ | 67% |
| 4 | कोलकाता नाइट राइडर्स | $109 मिलियन | ₹905 करोड़ | 38% |
| 5 | सनराइजर्स हैदराबाद | $85 मिलियन | ₹705 करोड़ | 76% |
| 6 | राजस्थान रॉयल्स | $81 मिलियन | ₹670 करोड़ | 30% |
| 7 | दिल्ली कैपिटल्स | $80 मिलियन | ₹660 करोड़ | 24% |
| 8 | गुजरात टाइटन्स | $69 मिलियन | ₹570 करोड़ | 5% |
| 9 | पंजाब किंग्स | $68 मिलियन | ₹560 करोड़ | 49% |
| 10 | लखनऊ सुपर जायंट्स | $60 मिलियन | ₹495 करोड़ | 29% |
IPL सिस्टम वैल्यूएशन (2009-2024)
| वर्ष | वैल्यूएशन (अमेरिकी डॉलर बिलियन में) |
|---|---|
| 2009 | 2.0 |
| 2010 | 4.1 |
| 2011 | 3.7 |
| 2012 | 2.9 |
| 2013 | 3.3 |
| 2014 | 3.2 |
| 2015 | 3.7 |
| 2016 | 2.5 |
| 2017 | 3.8 |
| 2018 | 5.3 |
| 2019 | 5.7 |
| 2020 | 4.4 |
| 2021 | 4.7 |
| 2022 | 8.4 |
| 2023 | 10.7 |
| 2024 | 12.0 |
