राजस्थान रॉयल्स को खरीदने की दौड़ में आदित्य बिड़ला समूह को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
आरसीबी और राजस्थान रॉयल्स को खरीदने की दौड़ से पांच बोलीदाता बाहर

आईपीएल फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और राजस्थान रॉयल्स को खरीदने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ताजा जानकारी के अनुसार पांच इच्छुक पक्ष अब इस दौड़ से बाहर हो चुके हैं।
सोलह मार्च को बोली लगाने की अंतिम तारीख थी। शुरुआत में उम्मीद थी कि आरसीबी के लिए सात बोलीदाता सामने आएंगे जबकि राजस्थान रॉयल्स के लिए पांच कंपनियां बोली लगाएंगी। हालांकि अब यह संख्या कम हो गई है क्योंकि पांच कंपनियों ने अपनी दिलचस्पी वापस ले ली है।
आरसीबी के लिए तीन कंपनियों के बीच मुकाबला
आरसीबी को खरीदने की दौड़ से कई बड़े नाम बाहर हो गए हैं। अदर पूनावाला के नेतृत्व वाला समूह, टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप, प्रेमजी इन्वेस्ट और कैप्री ग्लोबल ने आरसीबी को खरीदने की प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया है।
अब इस फ्रेंचाइजी को खरीदने की दौड़ में मुख्य रूप से तीन पक्ष बचे हैं।
| संभावित बोलीदाता | साझेदारी |
|---|---|
| ईक्यूटी | स्वतंत्र निवेश समूह |
| एवराम ग्लेजर | लांसर कैपिटल |
| रंजन पाई | केकेआर और टेमासेक के साथ |
स्वीडन की प्राइवेट इक्विटी कंपनी ईक्यूटी इस समय सबसे आगे मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि उसने लगभग दो से दो दशमलव एक अरब डॉलर के बीच की बाध्यकारी बोली लगाई है।
एवराम ग्लेजर की कंपनी लांसर कैपिटल ने पहले लगभग एक दशमलव आठ अरब डॉलर की बोली लगाई थी। हालांकि उनके पास स्थानीय साझेदार नहीं होने के कारण उन्हें चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
राजस्थान रॉयल्स को खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी
राजस्थान रॉयल्स के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। यहां केवल एवराम ग्लेजर की कंपनी लांसर कैपिटल ने दौड़ से बाहर होने का फैसला किया है।
बीसीसीआई के नियमों के अनुसार कोई भी एक कंपनी एक से ज्यादा आईपीएल फ्रेंचाइजी की मालिक नहीं बन सकती। इसी वजह से उन्होंने राजस्थान रॉयल्स की प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया।
फिलहाल राजस्थान रॉयल्स को खरीदने की दौड़ में ये प्रमुख नाम शामिल हैं।
| संभावित बोलीदाता | साझेदारी |
|---|---|
| कल सोमानी | रॉब वॉल्टन के साथ |
| आदित्य बिड़ला समूह | डेविड ब्लिट्जर की बोल्ट वेंचर्स के साथ |
| टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप | स्वतंत्र बोली |
| कैप्री ग्लोबल | संभावित साझेदारी के साथ |
आदित्य बिड़ला समूह इस समय सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वहीं कैप्री ग्लोबल को डार्क हॉर्स कहा जा रहा है क्योंकि वह किसी अन्य बोलीदाता के साथ साझेदारी कर सकता है।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी
आम तौर पर जिस कंपनी की बोली सबसे ज्यादा होगी वही फ्रेंचाइजी का नया मालिक बनती है। यदि दो बोली एक जैसी होती हैं तो अंतिम फैसला फ्रेंचाइजी प्रबंधन को करना पड़ता है।
आमतौर पर मालिकाना हक बदलने की प्रक्रिया में चार से छह सप्ताह का समय लगता है। हालांकि आरसीबी के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है क्योंकि मौजूदा मालिक कंपनी डियाजियो ने इकतीस मार्च तक का समय तय किया है।
दूसरी ओर राजस्थान रॉयल्स के मालिक इमर्जिंग मीडिया वेंचर्स ने अभी तक कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की है इसलिए उनके मामले में बातचीत ज्यादा समय तक चल सकती है।
इसके अलावा किसी भी फ्रेंचाइजी के मालिकाना हक में बदलाव को अंतिम मंजूरी बीसीसीआई से लेनी होती है। यह मंजूरी अक्टूबर में होने वाली बोर्ड की वार्षिक आम बैठक के बाद ही मिल सकती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरसीबी को खरीदने की दौड़ में अब मुख्य रूप से तीन कंपनियां बची हैं जिनमें ईक्यूटी, एवराम ग्लेजर की लांसर कैपिटल और रंजन पाई का समूह शामिल है।
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