क्रिकबज़ के पीएसएल डील पर उठे सवाल, सनराइजर्स हैदराबाद पर पहले क्यों निशाना

सन ग्रुप, जो सनराइजर्स हैदराबाद और सनराइजर्स लीड्स के मालिक हैं, अब पाकिस्तान से जुड़े मामलों में अकेले बड़े भारतीय नाम नहीं रह गए हैं। इस महीने की शुरुआत में द हंड्रेड नीलामी में पाकिस्तानी स्पिनर अबरार अहमद को खरीदने के बाद सनराइजर्स और काव्या मारन को भारी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर भविष्य में पाकिस्तान की ओर से किसी भारतीय की जान जाती है, तो सनराइजर्स के हाथ खून से सने होंगे।
इसी बीच, एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दुनिया की प्रमुख क्रिकेट वेबसाइट्स में से एक क्रिकबज़ ने पाकिस्तान सुपर लीग के साथ साझेदारी करने का फैसला किया है।
क्रिकबज़ और पीएसएल डील
तेइस मार्च को वाली टेक्नोलॉजीज, जो दो हजार उनतीस तक पीएसएल के मीडिया राइट्स होल्डर हैं, ने घोषणा की कि क्रिकबज़ PSL दो हजार छब्बीस सीजन के लिए नॉर्थ अमेरिका और मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका क्षेत्रों में आधिकारिक ब्रॉडकास्ट पार्टनर होगा।
क्रिकबज़ में टाइम्स ग्रुप की बहुमत हिस्सेदारी है, जो टाइम्स ऑफ इंडिया और इकनॉमिक टाइम्स जैसे बड़े मीडिया संस्थानों का मालिक है। इसके अलावा, ड्रीम स्पोर्ट्स, जो ड्रीम इलेवन की पैरेंट कंपनी है, ने भी क्रिकबज़ और विलो टीवी में लगभग पचास मिलियन डॉलर का निवेश किया हुआ है।
हर तरफ दोहरे मापदंड
टाइम्स ग्रुप इंडियन प्रीमियर लीग में राजस्थान रॉयल्स को खरीदने की दौड़ में भी शामिल है। जब सनराइजर्स को लेकर जनता में गुस्सा था, तब इस बड़े मीडिया नेटवर्क पर उतनी तीखी प्रतिक्रिया नहीं दिखी, जबकि इसका प्रभाव देशभर में काफी बड़ा है।
इसी महीने क्रिकबज़ को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का आधिकारिक ऐप पार्टनर भी बनाया गया। पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद आरसीबी ने भारतीय सेना के समर्थन में खुलकर बयान दिया था, लेकिन अब वही टीम क्रिकबज़ के साथ जुड़ रही है।
सबसे बड़ी विडंबना खुद क्रिकबज़ को लेकर है। पिछले साल इसी प्लेटफॉर्म ने PSL को अपने कवरेज से हटा दिया था, लेकिन अब दस महीने बाद वही कंपनी PSL के साथ साझेदारी कर रही है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या उस समय लिया गया फैसला वास्तव में भावनाओं के कारण था या सिर्फ आर्थिक दबाव के चलते।
जनता और संस्थाओं पर भी सवाल
इस पूरे मामले में आम जनता की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। सनराइजर्स और काव्या मारन को आसानी से निशाना बनाया गया, लेकिन क्या वही प्रतिक्रिया अब क्रिकबज़ के लिए भी देखने को मिलेगी।
सनराइजर्स ने अबरार अहमद पर लगभग दो करोड़ चौंतीस लाख रुपये खर्च किए थे, जबकि PSL डील की कीमत सालाना लगभग दो सौ अठारह करोड़ रुपये बताई जा रही है।
अब सवाल यह भी उठता है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पर उतनी आलोचना क्यों नहीं होती। भारत और पाकिस्तान एशिया कप और आईसीसी टूर्नामेंट्स में आमने सामने आते हैं।
अनुमानों के अनुसार बीसीसीआई ने दो हजार पच्चीस छब्बीस वित्तीय वर्ष में करीब आठ हजार नौ सौ तिरसठ करोड़ रुपये का राजस्व कमाया। इसके मुकाबले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की कुल संपत्ति काफी कम है।
तो फिर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब इतनी आर्थिक ताकत है, तो पूरी तरह बहिष्कार क्यों नहीं किया जाता।
निष्कर्ष
यह मुद्दा सिर्फ देशभक्ति का नहीं है, बल्कि यह दिखावे और चयनात्मक प्रतिक्रिया का मामला बनता जा रहा है। जब तक बड़े संस्थानों और निर्णय लेने वालों पर समान रूप से सवाल नहीं उठेंगे, तब तक ऐसी बहसें अधूरी ही रहेंगी।
मुख्य तुलना
| मुद्दा | सनराइजर्स हैदराबाद | क्रिकबज़ और टाइम्स ग्रुप |
|---|---|---|
| विवाद का कारण | अबरार अहमद की खरीद | PSL ब्रॉडकास्ट डील |
| खर्च | लगभग 2.34 करोड़ रुपये | लगभग 218 करोड़ रुपये सालाना |
| सार्वजनिक प्रतिक्रिया | तीखी आलोचना | अपेक्षाकृत शांत |
| प्रभाव | फ्रेंचाइजी स्तर | राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर |
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्रिकबज़ ने PSL दो हजार छब्बीस के लिए नॉर्थ अमेरिका और मिडिल ईस्ट नॉर्थ अफ्रीका क्षेत्रों में ब्रॉडकास्ट पार्टनर बनने का समझौता किया है।
टीम ने द हंड्रेड नीलामी में पाकिस्तानी खिलाड़ी अबरार अहमद को खरीदा था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
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