
जहानारा आलम बांग्लादेश महिलाओं की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान और अनुभवी तेज गेंदबाज, ने एक पूर्व चयनकर्ता एवं टीम अधिकारी पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने बताया है कि यह आरोपित घटनाएं 2022 महिला वनडे विश्व कप के दौरान तथा उसके पहले-पिछले समय में हुई थीं।
आरोपों का विवरण
जहानारा का कहना है कि एक प्री-कैम्प या नेट्स सत्र में उस चयनकर्ता ने उनके कंधे पर हाथ रखा, उन्हें अपनी ओर खींचा और कान के पास बोलने लगे।
उन्होंने दावा किया है कि उस व्यक्ति ने उनसे पूछा: “तुम्हारा मासिक धर्म कितने दिन हुआ?” और बाद में कहा: “जब तुम्हारा पीरियड खत्म हो जाए, मुझे बता देना, मुझे अपनी ओर भी देखना है।”
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने बोर्ड के CEO को “निरीक्षण पत्र” भेजा था, लेकिन समस्या बनी रही।
पूर्व चयनकर्ता ने इन सभी आरोपों को “बेआधार” बताते हुए खारिज कर दिया है।
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की प्रतिक्रिया
BCB ने एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि “हमने राष्ट्रीय महिला टीम की एक पूर्व सदस्य द्वारा मीडिया में की गई इन आरोपों को चिंतापूर्वक देखा है, जिनमें टीम से जुड़े कुछ व्यक्तियों द्वारा कथित अनुचित आचरण शामिल है।”
इसके चलते एक जाँच समिति गठित की गई है, जिसे 15 कार्यदिवसों के अंदर अपनी रिपोर्ट एवं सिफारिशें प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
बोर्ड अध्यक्ष ने कहा है कि “यौन उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा” और खिलाड़ियों एवं स्टाफ के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
प्रभाव और आगे क्या देखने योग्य है
यह मामला बांग्लादेश महिला क्रिकेट में टीम प्रबंधन व खिलाड़ियों के बीच संबंधों पर सवाल खड़े कर रहा है।
जाँच प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता इस पूरे मामले की साख के लिए अहम होगी चाहे समिति कितनी स्वतंत्र है, सबूतों तक पहुंच कैसे है, पीड़ितों एवं गवाहों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
हो सकता है कि इस मामले के चलते BCB में संरचनात्मक बदलाव आएँ जैसे कि सुरक्षित खेल माहौल के लिए ग्रिवांस मैकेनिज़म, महिला खिलाड़ियों के लिए संवेदनशील शिकायत प्रणाली।
जहानारा के लिए यह फैसला बोलने का जोखिम रहा है, लेकिन साथ ही यह एक मौका भी हो सकता है कि भविष्य में अन्य महिला खिलाड़ियों को बेहतर समर्थन मिले।
संक्षिप्त में
जहानारा आलम द्वारा लगाए गए आरोप बहुत गंभीर और चिंताजनक हैं। BCB ने आधिकारिक रूप से जाँच शुरू कर दी है और ‘ज़ीरो-टॉलरेंस’ की सार्वजनिक प्रतिज्ञा की है। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि किस प्रकार इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है और न्याय किस प्रकार लागू होता है उनके लिए, अन्य खिलाड़ियों के लिए, और बांग्लादेश महिला क्रिकेट की प्रतिष्ठा के लिए।
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