अक्षर पटेल की वापसी तय, संजू सैमसन को मिल सकता है मौका

भारतीय टीम जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले बेहद अहम मुकाबले से पहले चेपॉक पहुंची और वहां अपना पहला अभ्यास सत्र किया। गुरुवार (26 फरवरी) को खेला जाने वाला यह मैच भारत के लिए ‘करो या मरो’ जैसा है। अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली 76 रन की करारी हार के बाद टीम का खिताब बचाने का अभियान मुश्किल में पड़ गया है।
बड़ी हार के बाद टीम में बदलाव की चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन कुछ रणनीतिक बदलाव भारत जरूर कर सकता है। उपकप्तान अक्षर पटेल, जो पिछले दो मैचों में टीम से बाहर थे, अब प्लेइंग इलेवन में वापसी के लिए तैयार दिख रहे हैं। उनकी जगह वॉशिंगटन सुंदर को बाहर किया जा सकता है, क्योंकि यह एक समान भूमिका वाला बदलाव होगा।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सुंदर को शामिल करने की रणनीति सफल नहीं रही थी, इसलिए अक्षर की वापसी लगभग तय मानी जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल संजू सैमसन को लेकर है। केरल के इस बल्लेबाज को नामीबिया के खिलाफ मौका मिला था, जब अभिषेक शर्मा बीमार थे। जैसे ही अभिषेक फिट हुए, सैमसन को फिर से बाहर बैठना पड़ा।
अभिषेक का प्रदर्शन अब तक खास नहीं रहा है। चार पारियों में तीन बार शून्य पर आउट होने के साथ उन्होंने सिर्फ एक बार 15 रन बनाए हैं। फिर भी उनके पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए टीम प्रबंधन उन्हें इस खराब दौर से उबरने का मौका दे सकता है।
हालांकि तिलक वर्मा और रिंकू सिंह के बारे में यही बात नहीं कही जा सकती। दोनों बाएं हाथ के बल्लेबाज अब तक उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं, खासकर तिलक वर्मा। हालांकि एशिया कप 2025 के फाइनल में उनकी शानदार पारी उन्हें फिलहाल टीम में बनाए रख सकती है।
रिंकू सिंह भी अभी तक प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त मौके भी नहीं मिले हैं। वह अक्सर अपने तय फिनिशर रोल से अलग बल्लेबाजी करते नजर आए हैं। ऐसे में टीम प्रबंधन बाएं हाथ के बल्लेबाजों की संख्या कम करने के लिए इनमें से किसी एक को बाहर कर सैमसन को मौका दे सकता है।
दिलचस्प बात यह रही कि पहले अभ्यास सत्र में रिंकू सिंह नजर नहीं आए। इससे संकेत मिल रहा है कि उत्तर प्रदेश के इस बल्लेबाज की जगह सैमसन को मौका मिल सकता है।
अगर बल्लेबाजी क्रम की बात करें तो तिलक वर्मा की जगह सैमसन को शामिल करना ज्यादा संतुलित विकल्प होता, क्योंकि इससे बाकी बल्लेबाज अपनी तय पोजीशन पर खेलते रह सकते थे। लेकिन अगर रिंकू बाहर होते हैं, तो बल्लेबाजी क्रम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। टीम अलग-अलग बल्लेबाजों को ऊपर-नीचे भेजने की रणनीति अपना सकती है।
अब देखना होगा कि भारतीय टीम प्रबंधन इस अहम मुकाबले से पहले कौन सा फैसला लेता है, क्योंकि जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत ही भारत के सेमीफाइनल की उम्मीदों को जिंदा रख सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दक्षिण अफ्रीका से हार के बाद सेमीफाइनल की उम्मीदें बनाए रखने के लिए भारत को यह मैच जीतना जरूरी है।
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