इस प्रदर्शन से वह एक सीजन में साठ विकेट लेने वाले चुनिंदा तेज़ गेंदबाज़ों में शामिल हो गए और भारत टीम के लिए मजबूत दावेदार बने।
औक़िब नबी का ऐतिहासिक स्पेल जम्मू कश्मीर को रणजी ट्रॉफी खिताब के करीब

हुबली में औक़िब नबी के पास अधूरा काम था और उन्होंने खुद से वादा किया था कि शुक्रवार को वह इसे पूरा करेंगे। चौथे दिन उन्होंने अपने वादे पर पूरी तरह अमल किया। दो सत्रों में उन्होंने ऐसा यादगार स्पेल डाला, जिसने उन्हें भारत की टेस्ट टीम के और करीब पहुंचा दिया और जम्मू कश्मीर को पहली ही कोशिश में ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी जीत की दहलीज तक पहुंचा दिया।
तीसरे दिन रात को कर्नाटक का स्कोर पांच विकेट पर दो सौ बाइस रन था। उस समय मायंक अग्रवाल क्रीज पर जमे हुए थे और शतक की ओर बढ़ रहे थे। औक़िब नबी के लिए यह थोड़ी कसक भरी स्थिति थी क्योंकि उन्हें अग्रवाल के खिलाफ ज्यादा गेंदबाज़ी करने का मौका नहीं मिला था। गुरुवार दोपहर दोनों छोर से नौ ओवर के अपने शानदार स्पेल में नबी ने के एल राहुल करुण नायर और आर स्मरण को पूरी तरह बांध कर रखा था लेकिन अनुभवी मायंक अग्रवाल उस दबाव से निकलने में कामयाब रहे।
अपने पहले स्पेल में अग्रवाल ने नबी की केवल चार गेंदें खेलीं। हालांकि नबी के लिए संकेत साफ थे। अग्रवाल का आगे बढ़कर खेलना उन्हें स्विंग से बचा रहा था। इसके बाद अग्रवाल ने स्पिनरों के खिलाफ कट शॉट ड्राइव और फ्लिक लगाते हुए अपनी पहली रणजी ट्रॉफी फाइनल पारी में शतक पूरा किया।
तीसरे दिन के खेल के बाद नबी ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि अगली सुबह एक सत्र में कर्नाटक को आउट कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी माना था कि अगर उन्हें अग्रवाल के खिलाफ ज्यादा गेंदें डालने का मौका मिलता तो बेहतर होता लेकिन अग्रवाल आगे बढ़कर खेलते हुए स्विंग को बेअसर कर रहे थे।
चौथे दिन की सुबह अग्रवाल जम्मू कश्मीर और कर्नाटक की बड़ी बढ़त के बीच दीवार बनकर खड़े थे। तभी नबी ने एक बार फिर अपनी गेंदबाज़ी की समझ का बेहतरीन नमूना पेश किया। घरेलू दर्शकों के सामने उनका पांच विकेट का कारनामा स्टेडियम में सन्नाटा ले आया। तेईस ओवर में सात मेडन के साथ चौवन रन देकर पांच विकेट लेकर नबी ने दिखा दिया कि वह लाल गेंद क्रिकेट के कितने खास गेंदबाज़ हैं।
शुक्रवार को उनहत्तर ओवर पुरानी गेंद से आक्रमण की शुरुआत करते हुए नबी ने विकेटकीपर कन्हैया वाधावन को स्टंप्स के पास बुलाया। अग्रवाल तेज़ कदमों से आगे बढ़कर खेलने की कोशिश कर रहे थे। दूसरे नए गेंद से पहले नबी ने खुद को एक सटीक लाइन और लेंथ के लिए तैयार किया।
अठासीवें ओवर में नबी की एक ढीली गेंद को विद्या धर पाटिल ने डीप कवर की ओर भेज दिया। इसके बाद जब बल्लेबाज़ को सख्त गेंद की उम्मीद थी तब नबी ने लेंथ में बदलाव किया। बीसवें ओवर में उन्होंने चैनल में छोटी गेंद डाली जिससे अग्रवाल पहली बार असहज दिखे। बाहरी किनारा लगा और गेंद विकेटकीपर के दस्तानों को चीरते हुए बाउंड्री तक चली गई।
अगले ओवर में अग्रवाल ने पुल शॉट खेला लेकिन फिर से आगे बढ़कर खेलने लगे। नबी ने तुरंत सही जगह पर गेंद डाली। आगे की ओर बढ़ते हुए और बाईं तरफ खिसकते हुए अग्रवाल एलबीडब्ल्यू हो गए और कर्नाटक की पारी को बड़ा झटका लगा।
इसके बाद नबी ने शिखर शेट्टी को भी एलबीडब्ल्यू आउट कर अपना सीजन का सातवां पांच विकेट हॉल पूरा किया। साठ विकेट लेकर वह रणजी ट्रॉफी के बानवे साल के इतिहास में एक सीजन में इतने विकेट लेने वाले केवल तीसरे तेज़ गेंदबाज़ बने।
कर्नाटक की टीम दो सौ तिरानवे रन पर सिमट गई और तीन सौ दो रन की बढ़त ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। दूसरी पारी में जम्मू कश्मीर के कप्तान पारस डोगरा को भी कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ा। आखिरकार दूसरे सत्र में प्रसिध कृष्णा ने उन्हें बोल्ड किया जिन्होंने इस मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रथम श्रेणी प्रदर्शन किया।
अब जब खेल के लिए केवल पांच से थोड़ा ज्यादा सत्र बाकी हैं तब कर्नाटक की टीम औक़िब नबी की धारदार गेंदबाज़ी के सामने कमजोर पड़ती दिख रही है। बारामुला का यह तेज़ गेंदबाज़ जल्द ही भारत के लिए लाल गेंद क्रिकेट में एक भरोसेमंद नाम बन सकता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उन्होंने चौथे दिन पांच विकेट लेकर कर्नाटक की पारी को झकझोर दिया।
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