Cheteshwar Pujara’s Career Saved by Shah Rukh Khan? Wife Reveals Untold Story

चेतेश्वर पुजारा की भारतीय क्रिकेट में यात्रा अक्सर उनकी धैर्य, संतुलन और लंबी पारियों में गेंदबाज़ों को थकाने की क्षमता के लिए सराही जाती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका करियर उस समय लगभग रुक ही गया था जब वह अभी सही मायनों में शुरुआत ही कर रहे थे।
यह कहानी IPL 2010 सीज़न में पुजारा के कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) से जुड़ने के शुरुआती दिनों की है। उस समय पुजारा ने एक भी मैच नहीं खेला था, लेकिन उन्हें गंभीर ACL (Anterior Cruciate Ligament) इंज़ुरी हो गई थी। यह चोट उस समय उनके करियर के लिए बहुत बड़ा झटका थी, क्योंकि वह घरेलू क्रिकेट में उभरते सितारे थे।
इसी मुश्किल समय में KKR के सह-मालिक शाहरुख़ खान (SRK) ने हस्तक्षेप किया और पुजारा और उनके परिवार को असाधारण समर्थन प्रदान किया। यह कहानी हाल ही में पुजारा की पत्नी की किताब में सामने आई, जिसमें SRK के व्यक्तिगत योगदान का जिक्र है।
SRK का हस्तक्षेप जब पुजारा का करियर संकट में था
शाहरुख़ खान को पुजारा की चोट की जानकारी तब मिली जब वह और उनका परिवार मानसिक रूप से परेशान थे। ACL की गंभीरता किसी भी खिलाड़ी के लिए स्पष्ट है, खासकर ऐसे बल्लेबाज़ के लिए जो अपने फ्रंट नील (front knee) और सही फुटवर्क पर भरोसा करता हो।
पुजारा ने अभी तक टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू नहीं किया था और वह अपनी पहचान बना रहे थे। शाहरुख़ ने परिवार को आश्वासन दिया कि पुजारा का भविष्य उज्जवल है और उन्हें सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सहायता मिलनी चाहिए।
“भाग्य ने उन्हें उस गेंद के लिए अंधाधुंध दौड़ने पर मजबूर किया जो वहां नहीं थी; परिणामस्वरूप: ACL का फटना, संभावित सर्जरी और क्रिकेट करियर का अस्थायी रुकना – वह भी बिना KKR के लिए कोई मैच खेले।”
— पुजारा की पत्नी, The Diary of a Cricketer’s Wife
KKR प्रबंधन ने तुरंत सर्जरी की व्यवस्था की, सभी जरूरी दस्तावेज़ तैयार किए, और पुजारा को भरोसेमंद डॉक्टरों से इलाज कराया। परिवार का मानसिक तनाव कम करने के लिए पुजारा के पिता को दक्षिण अफ़्रीका तक लाया गया ताकि वह उनके साथ रहें। यह कदम खिलाड़ी के प्रति सच्ची जिम्मेदारी और मानवता का प्रतीक था, न कि केवल व्यवसायिक दृष्टिकोण।
सर्जरी लंबी और थकाऊ रही, लेकिन यह समय पुजारा के करियर में मोड़ साबित हुआ। सर्जरी सफल रही, पुजारा ने शारीरिक आत्मविश्वास फिर से हासिल किया, और जल्द ही भारत की टेस्ट टीम में महत्वपूर्ण बल्लेबाज़ बन गए। यह घटना दिखाती है कि सहानुभूति और सही नेतृत्व खेलों में करियर को कितना प्रभावित कर सकता है।
पुजारा की वापसी और SRK के समर्थन की विरासत
पुजारा ने अपनी वापसी जल्दबाज़ी में नहीं की। उन्होंने महीनों लगाकर तकनीक और मांसपेशियों की ताकत को फिर से मजबूत किया, क्योंकि उनकी फ्रंट नील की स्थिरता उनके फ़ॉरवर्ड डिफेंसिव खेल के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी।
उनकी मेहनत रणजी ट्रॉफी में दिखाई दी, जहां उन्होंने फिर से भारी रन बनाना शुरू किया और चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। 2010 में उनका टेस्ट डेब्यू हुआ, और उन्होंने बॉर्डर-गवaskar सीरीज़ में कई यादगार पारियां खेलीं, जिनसे भारत ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
हालांकि IPL में उनका करियर कभी प्रमुख नहीं बन पाया, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। उन्होंने KKR, RCB और PBKS के लिए कुछ मैच खेले, लेकिन उनकी ताकत लंबे फॉर्मेट में ही चमकी, जहां उनका धैर्य और तकनीक पूरी तरह से दिखाई देती थी।
पुजारा ने भारत के लिए 103 टेस्ट मैच खेले, 7,195 रन बनाए और औसत 43.60 से टीम की मुख्य बैटिंग मजबूत की। उनका अंतिम मैच 2023 WTC फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रहा।
SRK का प्रारंभिक विश्वास और व्यावहारिक सहयोग पुजारा के करियर में मौन लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाया। पुजारा और उनके परिवार के लिए यह यादें सिर्फ़ आंकड़ों में नहीं, बल्कि आभार में सुरक्षित हैं। यह दिखाता है कि कभी-कभी करियर को केवल प्रतिभा और अनुशासन ही नहीं, बल्कि सहानुभूति और सही समय पर विश्वास भी आकार देते हैं।
पुजारा अंततः भारत के सबसे भरोसेमंद टेस्ट बल्लेबाज़ों में से एक बन गए, जिन्होंने धैर्य, एकाग्रता और मजबूती के साथ अपने करियर को संजोया।
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