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Royal Challengers Bengaluru Up for Sale as Diageo Confirms

by Rohit G

भारत की प्रीमियर क्रिकेट लीग (आईपीएल) की प्रमुख टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) संभवतः बड़े स्वामित्व परिवर्तन की कगार पर है। ब्रिटिश पेय-भोजन कंपनी Diageo plc अपने भारतीय उपक्रम यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (यूएसएल) के माध्यम से इस फ्रैंचाइज़ी का मालिक है और अब यूएसएल ने आरसीबी में अपने निवेश की «रणनीतिक समीक्षा» शुरू करने की घोषणा की है।

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५ नवंबर २०२५ को जारी किए गए बयान में यूएसएल ने कहा है कि यह समीक्षा मार्च २०२६ के अंत तक पूरी की जाएगी। इसका अर्थ यह है कि कंपनी आरसीबी को रख सकती है, हिस्सेदारी बेच सकती है या पूरी तरह अलग हो सकती है। वर्ष के आरंभ में मीडिया में यह खबर आई थी कि डायेज़ियो आरसीबी बेचने पर विचार कर रहा है, और इसकी अनुमानित वैल्यूएशन २ अरब डॉलर (लगभग ₹17,000 करोड़) तक बताई जा रही थी।

हालांकि यूएसएल ने जून २०२५ में स्पष्ट किया था कि «मीडिया में आ रही रिपोर्टें अनुमान पर आधारित हैं» और कंपनी किसी भी तरह की बिक्री या सौदे की प्रक्रिया में नहीं है। परंतु अब शुरू हुई समीक्षा यह इंगित करती है कि स्थिति वास्तव में बदली जा सकती है।

अब क्यों?
आरसीबी ने २०२५ में अपनी पहली आईपीएल चैंपियनशिप जीती, जिससे उसकी ब्रांड वैल्यू और व्यावसायिक संभावनाएं काफी बढ़ गई थीं। इसी दौरान भारत में अल्कोहल विज्ञापन और स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप पर स्वास्थ्य मंत्रालय की निगरानी तेज हो रही है, जिससे डायेज़ियो जैसे शराब-ब्रांड वाले व्यवसाय के लिए स्पोर्ट्स फ्रैंचाइज़ी का होना रणनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस तरह, गैर-मूल व्यापार में रखा आरसीबी फ्रैंचाइज़ी को बेच कर डायेज़ियो पूंजी मुक्त कर सकता है और अपने मुख्य व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।

परिणाम क्या हो सकते हैं?
आरसीबी के लिए नए मालिक के आने से ब्रांडिंग, निवेश नीति और संभवतः स्टेडियम-निर्माण एवं निर्णय प्रक्रिया में बदलाव हो सकते हैं। वहीं बाजार विश्लेषक कह रहे हैं कि यदि यह सौदा होता है तो आईपीएल में फ्रैंचाइज़ी वैल्यूएशन का नया मापदंड बन सकता है। डायेज़ियो/यूएसएल के लिए, यह समीक्षा एक संकेत है कि कंपनी अपनी ग्लोबल रणनीति के अनुरूप गैर-मूल व्यवसाय पर फैसला ले रही है।

आगे क्या?
मार्च २०२६ तक समीक्षा पूरी होने की बात कही गई है, इसलिए इस अवधि में सलाहकार नियुक्ति, संभावित खरीदारों का चयन या निर्णय का खुलासा हो सकता है। तब तक आरसीबी के प्रशंसक, आईपीएल प्रशासक एवं निवेशक सोचेंगे कि क्या रेड एंड गोल्ड अपना रंग बदलेंगे या उसी छत के नीचे रहेंगे।

संक्षिप्त में, यूएसएल ने विनियामक रूप से अब तक सक्रिय बिक्री से इंकार किया है, लेकिन जो रणनीतिक समीक्षा शुरू हुई है, उससे स्पष्ट होता है कि आरसीबी का भविष्य अभी तय होना बाकी है। आने वाले महीनों में यह भारतीय खेल उद्योग की सबसे चर्चित फ्रैंचाइज़ी-सौदों में से एक बन सकती है।

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