Rajasthan Royals Sale New Bidders Join Race Ownership Update
आईपीएल की पहली चैंपियन टीम राजस्थान रॉयल्स इन दिनों बिक्री को लेकर चर्चा में है। इस टीम का मालिकाना हक रॉयल्स स्पोर्ट्स ग्रुप के पास है और इसमें कई हिस्सेदार शामिल हैं। वर्तमान में मनोज बदाले की कंपनी के पास 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि रेडबर्ड कैपिटल पार्टनर्स के पास 15 प्रतिशत और लचलन मर्डोक के पास 13 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बाकी हिस्सेदारी अन्य निवेशकों के पास है।
नए निवेशक की एंट्री
पिछले हफ्ते तक चार पक्ष इस टीम को खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे थे। मौजूदा निवेशक काल सोमानी ने रॉब वाल्टन के साथ मिलकर लगभग 1.3 बिलियन डॉलर की बोली लगाई है।
आदित्य बिड़ला ग्रुप डेविड ब्लिट्जर की कंपनी के साथ इस रेस में आगे माना जा रहा है। इसके अलावा टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप और कैपरी ग्लोबल भी इस दौड़ में शामिल हैं।
अब एक और बड़ा नाम सामने आया है। संजय गोविल, जो मेजर लीग क्रिकेट में वॉशिंगटन फ्रीडम के मालिक हैं और द हंड्रेड में वेल्श फायर के सह मालिक हैं, उन्होंने भी इस टीम को खरीदने में रुचि दिखाई है।
बड़ी बोली ठुकराई गई
रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान रॉयल्स ने हाल ही में 1.7 बिलियन डॉलर की बड़ी पेशकश को ठुकरा दिया था। यह बोली एक प्राइवेट इक्विटी ग्रुप ने लगाई थी। इसके बावजूद संजय गोविल इस रेस में बने हुए हैं।
बोली लगाने वाले प्रमुख निवेशक
| निवेशक | स्थिति |
|---|---|
| काल सोमानी और रॉब वाल्टन | 1.3 बिलियन डॉलर की पेशकश |
| आदित्य बिड़ला ग्रुप | मजबूत दावेदार |
| टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप | रेस में शामिल |
| कैपरी ग्लोबल | रेस में शामिल |
| संजय गोविल | नए दावेदार |
बीसीसीआई के नियमों का असर
पहले अवराम ग्लेजर की कंपनी भी इस रेस में शामिल थी, लेकिन बीसीसीआई के नियमों के कारण उन्हें बाहर होना पड़ा। नियम के अनुसार एक संस्था एक से ज्यादा टीमों की मालिक नहीं बन सकती।
मालिकाना हक बदलने में समय
आम तौर पर किसी टीम के मालिकाना हक में बदलाव की प्रक्रिया 30 से 45 दिनों में पूरी हो जाती है। लेकिन राजस्थान रॉयल्स के मौजूदा मालिक जल्दबाजी में नहीं हैं।
इस डील को अंतिम रूप देने के लिए बीसीसीआई की मंजूरी जरूरी होगी। यह मंजूरी अक्टूबर 2026 में होने वाली वार्षिक बैठक के बाद ही मिल सकती है।
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