MI vs RR H2H Record: Who Rules the Rivalry?
आईपीएल (IPL) के इतिहास में जब भी मुंबई इंडियंस (MI) और राजस्थान रॉयल्स (RR) की टीमें आमने-सामने होती हैं, तो फैंस को हमेशा एक बेहद रोमांचक मुकाबला देखने को मिलता है। दोनों ही टीमों का फैन बेस काफी बड़ा है और इनके बीच के आंकड़े हमेशा से काफी करीबी यानी 'कांटे की टक्कर' वाले रहे हैं।
आइए देखते हैं आईपीएल इतिहास में दोनों टीमों के बीच अब तक के हेड-टू-हेड (H2H) आंकड़े और रिकॉर्ड्स:
मुंबई इंडियंस बनाम राजस्थान रॉयल्स: ओवरऑल हेड-टू-हेड आंकड़े
आईपीएल इतिहास में दोनों टीमों के बीच अब तक कुल 31 मुकाबले खेले जा चुके हैं। इन आंकड़ों में मुंबई इंडियंस का पलड़ा राजस्थान रॉयल्स पर बेहद मामूली रूप से भारी है।
विवरण आंकड़े
कुल मैच खेले गए 31
मुंबई इंडियंस (MI) ने जीते 16
राजस्थान रॉयल्स (RR) ने जीते 14
बेनतीजा 01
वेन्यू के हिसाब से दोनों का प्रदर्शन
दोनों टीमों की भिड़ंत जब उनके घरेलू मैदानों पर होती है, तो कहानी थोड़ी बदल जाती है:
वानखेड़े स्टेडियम (मुंबई): मुंबई के इस घरेलू मैदान पर MI का दबदबा ज्यादा देखने को मिलता है। हालांकि, राजस्थान ने भी यहां कुछ मौकों पर मुंबई को कड़ी चुनौती दी है।
सवाई मानसिंह स्टेडियम (जयपुर): जयपुर के मैदान पर राजस्थान रॉयल्स का रिकॉर्ड बेहद शानदार है। यहां खेले गए अधिकांश मैचों में राजस्थान ने मुंबई को मात दी है।
दिलचस्प फैक्ट्स और ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स
कांटे की टक्कर: साल 2018 के बाद से राजस्थान रॉयल्स ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ अपने खेल में काफी सुधार किया है। एक समय ऐसा था जब राजस्थान ने लगातार कई मैचों में मुंबई इंडियंस को शिकस्त दी थी।
हाईएस्ट स्कोर: मुंबई इंडियंस ने राजस्थान के खिलाफ 214 रन का सर्वोच्च स्कोर बनाया है। वहीं, राजस्थान रॉयल्स का मुंबई के खिलाफ सबसे बड़ा स्कोर 212 रन रहा है।
लोएस्ट स्कोर: मुंबई का राजस्थान के खिलाफ न्यूनतम स्कोर 92 रन है, जबकि राजस्थान की टीम मुंबई के खिलाफ 90 रन पर भी ढेर हो चुकी है।
क्या कहता है मैच का विश्लेषण?
मुंबई इंडियंस जहां अपनी 5 बार की खिताबी जीत के अनुभव और 'चैंपियन मानसिकता' के साथ मैदान पर उतरती है, वहीं राजस्थान रॉयल्स (आईपीएल की पहली चैंपियन) हमेशा से अपने निडर और अटैकिंग क्रिकेट के लिए जानी जाती है।
जब भी ये दोनों टीमें आमने-सामने होती हैं, मुकाबला सिर्फ दो पॉइंट्स का नहीं बल्कि सम्मान और वर्चस्व का होता है। आंकड़े साफ बताते हैं कि किसी भी एक टीम को पूरी तरह से फेवरेट नहीं माना जा सकता, जो भी टीम मैच के दिन दबाव को बेहतर झेलेगी, बाजी उसी के हाथ लगेगी।