
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड बीसीसीआई ने अंडर 19 एशिया कप 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ मिली करारी हार के बाद अपनी युवा विकास प्रणाली की समीक्षा शुरू कर दी है। बोर्ड अब इस बात पर विचार कर रहा है कि वीवीएस लक्ष्मण, टीम मैनेजमेंट, चयनकर्ताओं और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए, ताकि खिलाड़ियों के विकास को मजबूत किया जा सके।
इस मुकाबले में पाकिस्तान ने समीर मिन्हास के शानदार शतक की बदौलत आठ विकेट पर 347 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम शुरुआत से ही दबाव में दिखी। पाकिस्तान के तेज गेंदबाजों ने लगातार आक्रामक गेंदबाजी की। अली रजा ने चार विकेट लिए, जबकि मोहम्मद सैयम और अब्दुल सुभान ने भी अहम योगदान दिया। नतीजा यह रहा कि भारतीय टीम मात्र 26.2 ओवर में 156 रन पर ऑलआउट हो गई।
भारत की इस हार के बाद बीसीसीआई ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड ने पिछले चार वर्षों में युवा खिलाड़ियों के विकास को लेकर चिंता जताई है। अब चयनकर्ताओं, टीम मैनेजमेंट और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच बेहतर समन्वय के तरीके खोजे जा रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भूमिकाओं को लेकर स्पष्टता की कमी है, खासकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के कोच और चयनकर्ताओं के बीच। वीवीएस लक्ष्मण, जिन्हें हाल ही में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख के रूप में दो साल का विस्तार मिला है, अंडर 19 टीम के चयन और कप्तानी के फैसलों में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
बीसीसीआई के एक सूत्र के अनुसार, भूमिकाओं को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। अंडर 19 टीम से जुड़े फैसलों पर लक्ष्मण का पूरा नियंत्रण है और कप्तान की नियुक्ति में भी उनकी अहम भूमिका रहती है। राहुल द्रविड़ के कार्यकाल के दौरान वह इंडिया ए टीम के चयन में सक्रिय रूप से शामिल रहते थे, क्योंकि वह हर खिलाड़ी के लिए विकास कार्यक्रम तैयार करते थे। मौजूदा समय में लक्ष्मण की इंडिया ए प्रक्रिया में भूमिका सीमित मानी जा रही है।
पाकिस्तान के खिलाफ मिली इस हार के अलावा इंडिया ए टीम का राइजिंग स्टार्स एशिया कप के फाइनल में नहीं पहुंच पाना भी चिंता का कारण बना है। इन नतीजों ने भारतीय क्रिकेट की खिलाड़ी विकास प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, टीम अधिकारियों का मानना है कि कई युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चुनौतियों के लिए अभी तैयार नहीं हैं। बहुत कम खिलाड़ी आयु वर्ग क्रिकेट से सीनियर स्तर तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं, जिससे प्रबंधन चिंतित है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने हाल ही में पूर्ण रूप से काम करना शुरू किया है और वीवीएस लक्ष्मण इस समय प्रशासनिक जिम्मेदारियों में अधिक व्यस्त हैं। इसी बीच कोचिंग स्टाफ में भी बड़े बदलाव हो रहे हैं। तेज गेंदबाजी कोच ट्रॉय कूली पर भी दबाव बढ़ गया है, क्योंकि युवा तेज गेंदबाजों के प्रदर्शन में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वीवीएस लक्ष्मण विकासात्मक टीमों के साथ ज्यादा दौरे नहीं करते, जबकि राहुल द्रविड़ इस मामले में काफी सक्रिय रहते थे। लक्ष्मण ज्यादातर उन दौरों पर गए हैं, जहां मुख्य भारतीय टीम टेस्ट सीरीज में व्यस्त रहती है और वहां दूसरी पंक्ति की भारतीय टीम भेजी जाती है।
सूत्रों का कहना है कि यह देखना जरूरी होगा कि क्या लक्ष्मण भविष्य में विकासात्मक टीमों के साथ अधिक समय बिता पाते हैं या नहीं।
इसके अलावा, राइजिंग स्टार्स एशिया कप के दौरान एक असामान्य फैसला भी चर्चा में रहा। सीनियर चयन समिति के अनुरोध पर जितेश शर्मा को टीम का कप्तान बनाया गया था। उन्होंने टीम संयोजन और मैच रणनीति तय करने में बड़ी भूमिका निभाई, जो आमतौर पर विकासात्मक टीमों में नहीं देखा जाता। सामान्य तौर पर ऐसे फैसले कोचिंग स्टाफ चयनकर्ताओं से सलाह लेकर करता है।
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