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ICC Restores England’s Review After Alex Carey Snicko Controversy Explained

by Sahail

मैदान पर तकनीक को लेकर इंग्लिश क्रिकेट का पुराना और जटिल रिश्ता एक बार फिर तब सामने आया, जब एशेज के तीसरे टेस्ट के पहले दिन ‘स्निको’ की गलती के कारण एलेक्स कैरी को जीवनदान मिल गया। कैच के पीछे की अपील के बावजूद उन्हें आउट नहीं दिया गया, जिसके बाद ICC को दखल देना पड़ा।

एशेज में स्निको विवाद के बाद ICC ने इंग्लैंड का रिव्यू बहाल किया

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि आवाज़ पर आधारित एज डिटेक्शन तकनीक कितनी भरोसेमंद है, खासकर टेस्ट क्रिकेट में, जहां एक ही फैसला पूरे मैच का रुख बदल सकता है।

विवाद तब हुआ जब कैरी 72 रन पर खेल रहे थे। जोश टंग की ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंद पर इंग्लैंड को साफ निक लगा। ऑन-फील्ड अंपायर अहसान रज़ा ने नॉट आउट दिया। इंग्लैंड ने रिव्यू लिया, लेकिन थर्ड अंपायर क्रिस गैफनी ने ऑन-फील्ड फैसला बरकरार रखा। रियल-टाइम स्निकोमीटर पर स्पाइक जरूर दिखा, लेकिन वह गेंद के बल्ले से संपर्क से कुछ फ्रेम पहले आया, जिसके कारण फैसला पलटा नहीं गया।

कुछ ही देर बाद भ्रम की वजह सामने आई। स्निको उपकरण उपलब्ध कराने वाली कंपनी BBG स्पोर्ट्स ने इस गलती की जिम्मेदारी ली। BBG स्पोर्ट्स ने कहा, “निष्कर्ष यही निकलता है कि उस समय स्निको ऑपरेटर ने गलत स्टंप माइक चुना, जिस पर ऑडियो प्रोसेसिंग लागू की गई। हम इस गलती के लिए माफी मांगते हैं और पूरी जिम्मेदारी लेते हैं।”

इस जीवनदान का कैरी ने पूरा फायदा उठाया और 106 रन की पारी खेली। दिन का खेल खत्म होने तक ऑस्ट्रेलिया ने 8 विकेट पर 326 रन बना लिए। इंग्लैंड के लिए हालात और खराब तब हुए, जब कैरी ने बाद में खुद माना कि उन्हें लगा था कि गेंद उनके बल्ले से लगी है। इस स्वीकारोक्ति के बाद इंग्लैंड की नाराज़गी और जायज़ मानी गई।

इसके बाद हेड कोच ब्रेंडन मैकुलम और टीम मैनेजर वेन बेंटले ने मैच रेफरी जेफ क्रो से शिकायत की। ICC के प्लेइंग कंडीशंस के तहत तकनीकी गलती को मानते हुए इंग्लैंड का एक रिव्यू बहाल कर दिया गया।

इंग्लैंड के बॉलिंग कोच डेविड सेकर ने भी इस घटना की आलोचना की। उन्होंने कहा, “वह एक बहुत बड़ा फैसला था। आज के समय में आप उम्मीद करते हैं कि तकनीक का स्तर इतना ऊंचा होगा कि वह ऐसी चीज़ों को सही तरीके से पकड़ सके।”

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने भी तकनीक पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “यहां जो तकनीक इस्तेमाल हो रही है, वह दूसरी जगहों की तुलना में उतनी अच्छी नहीं है। अंपायरों से पूछिए, वे भी मानेंगे कि इस तकनीक पर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता।”

पोंटिंग ने आगे कहा, “थर्ड अंपायर को ऊपर बैठकर फैसले लेने होते हैं। अगर तकनीक सही संकेत नहीं दे रही और अंपायर को अपने ‘गट फील’ पर जाना पड़े, तो यह ठीक नहीं है। फैसले पूरी तरह उपलब्ध तकनीक पर आधारित होने चाहिए।” जैसे-जैसे ICC इस मामले की आगे जांच कर रहा है और ECB बदलाव की कोशिश कर रहा है, एलेक्स कैरी का यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि निर्णय समीक्षा प्रणाली पर भरोसा कितनी जल्दी डगमगा सकता है।

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