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Controversy over the name of Pataudi Trophy: BCCI appeals to ECB to save the legacy of 'Pataudi'

by Anjani Nandan Tiwari

Controversy over the name of Pataudi Trophy: BCCI appeals to ECB to save the legacy of 'Pataudi'

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) से अनुरोध किया है कि वह भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जाने वाली टेस्ट सीरीज का नाम "पाटौदी ट्रॉफी" से बदलकर "एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी" रखने के फैसले पर पुनर्विचार करें।हालांकि BCCI ने स्पष्ट किया है कि यह सीरीज इंग्लैंड में खेली जा रही है, इसलिए नामकरण का अधिकार मेज़बान बोर्ड यानी ECB का ही है। बावजूद इसके, भारतीय बोर्ड ने इंग्लैंड बोर्ड से अपील की है कि भारत के सबसे युवा टेस्ट कप्तान नवाब मंसूर अली खान पाटौदी की विरासत को किसी न किसी रूप में बनाए रखा जाए।

BCCI ने भेजा पत्र, पटौदी के नाम से व्यक्तिगत पुरस्कार रखने की मांग

भारतीय बोर्ड ने इंग्लैंड बोर्ड को एक पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि पाटौदी के नाम पर कम से कम व्यक्तिगत प्लेयर अवॉर्ड रखा जाए। BCCI के एक अधिकारी ने The Indian Express से बात करते हुए कहा,

"हमने उनसे अनुरोध किया है कि पाटौदी के नाम पर पोस्ट-मैच में दिए जाने वाले किसी एक पुरस्कार का नाम रखा जाए। ECB ही यह तय करता है कि ट्रॉफी का नाम किस पर रखा जाएगा। यह उनका घरेलू आयोजन है, इसलिए BCCI की इसमें कोई भूमिका नहीं है।"

पटौदी ट्रॉफी का नाम बदलने पर शुरू हुआ विवाद

ट्रॉफी के नाम को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब ECB ने भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली टेस्ट सीरीज का नाम बदलकर "एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी" कर दिया। इस नामकरण में टेस्ट क्रिकेट के सबसे सफल तेज गेंदबाज़ जेम्स एंडरसन और सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को सम्मानित किया गया। हालांकि, यह फैसला फैंस और क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच विवाद और विभाजन का कारण बन गया।

भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर और पाटौदी परिवार के कुछ सदस्य इस फैसले के विरोध में सामने आए। मंसूर अली खान पाटौदी न केवल भारत के सबसे युवा टेस्ट कप्तान (21 वर्ष की उम्र में), बल्कि भारत को 1967 में न्यूजीलैंड में पहली विदेशी टेस्ट जीत दिलाने वाले कप्तान भी थे।

ECB ने सैफ अली खान को दी थी जानकारी

रिपोर्ट्स के अनुसार, ECB ने मंसूर अली खान पटौदी के बेटे और बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान को ट्रॉफी के नाम बदलने की जानकारी दी थी। हालांकि, BCCI का कहना है कि वे मेज़बान बोर्ड के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्होंने केवल यही अनुरोध किया है कि भारत के पूर्व कप्तान की विरासत को किसी न किसी रूप में सम्मानित किया जाए।

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