BCCI Reviews Overseas T20 League Policy for Retired Indian Cricketers

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड फिलहाल इस बात की समीक्षा कर रहा है कि भारतीय क्रिकेटर संन्यास लेने के बाद विदेशी T20 लीगों में कैसे प्रवेश करते हैं। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य स्पष्ट और व्यवस्थित नियम बनाना है, ताकि भारतीय क्रिकेट से बाहर निकलने के बाद खिलाड़ियों के लिए एक तय और अनुशासित रास्ता हो।
वर्तमान में BCCI सक्रिय भारतीय पुरुष क्रिकेटरों को किसी भी विदेशी T20 या T10 लीग में खेलने की अनुमति नहीं देता। यह नियम भारतीय घरेलू क्रिकेट और आईपीएल जैसे प्रमुख टूर्नामेंटों की गुणवत्ता और प्राथमिकता बनाए रखने के लिए लागू है।
हालांकि, किसी खिलाड़ी को विदेशी लीग में खेलने के योग्य बनने के लिए भारतीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से आधिकारिक रूप से संन्यास लेना अनिवार्य है। इसमें अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों स्तर शामिल हैं। यह नियम कई वर्षों से सख्ती से लागू है और मौजूदा नीति की आधारशिला माना जाता है।
रिटायरमेंट के बाद कूलिंग ऑफ पीरियड पर विचार
हाल ही में BCCI की एक अहम एपेक्स काउंसिल बैठक हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और फैसलों पर चर्चा की गई। इनमें से एक बड़ा मुद्दा यह था कि भारतीय क्रिकेटर रिटायरमेंट के बाद विदेशी T20 लीगों में कैसे जाते हैं।
क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड एक नए विचार पर चर्चा कर रहा है, जिसके तहत रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित प्रतीक्षा अवधि लागू की जा सकती है। इस प्रस्ताव के अनुसार, जो खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट से संन्यास लेकर विदेशी लीग खेलते हैं, उन्हें भारतीय प्रतियोगिताओं में वापसी के लिए लगभग पांच साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, यदि कोई खिलाड़ी रिटायरमेंट के बाद किसी भी लीग में हिस्सा नहीं लेता है, तो इस प्रतीक्षा अवधि को घटाकर एक साल किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ी जल्दबाजी में निर्णय न लें और रिटायरमेंट से पहले लंबी अवधि की योजना बनाएं।
हालिया खिलाड़ियों के फैसलों से बढ़ी BCCI की चिंता
हाल के कुछ खिलाड़ी निर्णयों ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। उदाहरण के तौर पर, केएस भारत ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की, लेकिन उन्होंने आईपीएल से पूरी तरह बाहर होने की बात स्पष्ट नहीं की, जो कि मौजूदा नियमों के तहत विदेशी लीग में खेलने के लिए जरूरी मानी जाती है।
इसी तरह, विजय शंकर ने भारतीय क्रिकेट से संन्यास लेने के तुरंत बाद खुद को लंका प्रीमियर लीग 2026 के लिए उपलब्ध कराया, जहां उन्हें कंडी रॉयल्स ने चुना। ऐसे मामलों ने BCCI के भीतर नीति को और सख्त बनाने पर चर्चा को तेज कर दिया है।
यह पहली बार नहीं है जब बोर्ड इस तरह के रुझान पर नजर रख रहा हो। इससे पहले दिनेश कार्तिक, युवराज सिंह, उन्मुक्त चंद, प्रवीन तांबे और इरफान पठान जैसे खिलाड़ी भी संन्यास के बाद विदेशी लीगों में खेल चुके हैं।
वैश्विक क्रिकेट विकास में BCCI की भूमिका
नीतिगत चर्चाओं के साथ-साथ BCCI अन्य देशों में क्रिकेट के विकास पर भी ध्यान दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत फिजी और मालदीव जैसे देशों को सहायता देने की योजनाएं बनाई जा रही हैं।
जनवरी में स्पोर्टस्टार से बातचीत में BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने छोटे क्रिकेट देशों की मदद करने की बोर्ड की प्रतिबद्धता दोहराई थी। उन्होंने कहा था कि बोर्ड फिजी, पापुआ न्यू गिनी और नामीबिया जैसे देशों की सहायता कर रहा है और भारतीय राज्य टीमों ने भी नामीबिया का दौरा किया है।
यह भी उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी BCCI ने उभरते क्रिकेट क्षेत्रों में प्रशिक्षण और कोचिंग स्तर सुधारने के लिए विशेषज्ञ भेजे हैं।
वर्तमान नियम और प्रस्तावित बदलाव की तुलना
| विषय | मौजूदा नियम | प्रस्तावित बदलाव |
|---|---|---|
| विदेशी लीग में खेलना | पूर्ण संन्यास जरूरी | संन्यास के बाद प्रतीक्षा अवधि |
| भारत में वापसी | स्पष्ट समयसीमा नहीं | पांच साल या एक साल |
| निर्णय प्रक्रिया | कम नियंत्रित | अधिक संरचित |
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