BCB Threatens to Pull Out of T20 World Cup 2026, Warning to ICC

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद को टी20 विश्व कप 2026 से हटने की चेतावनी दी है। भारत में होने वाले टूर्नामेंट के लिए यात्रा और सुरक्षा को लेकर बीसीबी और आईसीसी के बीच चर्चा चल रही थी। इसी दौरान बीसीबी की वित्त समिति के अध्यक्ष नजमुल हुसैन ने साफ शब्दों में कहा कि यदि उनके स्थल परिवर्तन के अनुरोध को अस्वीकार किया गया तो बांग्लादेश टूर्नामेंट से हट सकता है।
बीसीबी की सख्त चेतावनी
हाल ही में पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने बीसीबी को सावधानी बरतने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला बांग्लादेश क्रिकेट को नुकसान पहुंचा सकता है। इस बयान के बाद नजमुल ने उन्हें भारतीय एजेंट तक कह दिया था। अब नजमुल ने दोबारा स्पष्ट किया है कि टी20 विश्व कप से हटने पर बीसीबी को किसी तरह का वित्तीय नुकसान नहीं होगा।
नजमुल ने कहा कि यदि बांग्लादेश विश्व कप में हिस्सा नहीं लेता है तो बोर्ड को कोई नुकसान नहीं होगा बल्कि नुकसान खिलाड़ियों को होगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2027 तक बोर्ड की आय पहले से तय है और इस टूर्नामेंट का उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भविष्य के टूर्नामेंट या द्विपक्षीय सीरीज पर असर पड़ सकता है लेकिन इस विश्व कप से बोर्ड की आय प्रभावित नहीं होगी।
खिलाड़ियों को हो सकता है नुकसान
नजमुल ने आगे कहा कि यदि टीम टूर्नामेंट से हटती है तो खिलाड़ियों को मैच फीस नहीं मिलेगी। बोर्ड को आईसीसी से राशि मिलने के बावजूद खिलाड़ियों को कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि जब खिलाड़ी खराब प्रदर्शन करते हैं तब उनकी सैलरी नहीं काटी जाती तो अब उन्हें अतिरिक्त भुगतान क्यों किया जाए। इसके अलावा कई खिलाड़ियों को प्रायोजन राशि का भी नुकसान हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मैच फीस और पुरस्कार राशि सीधे खिलाड़ियों की होती है, बोर्ड का उस पर कोई अधिकार नहीं होता। बोर्ड को इससे न लाभ होता है और न ही नुकसान। उनका मानना है कि बोर्ड और खिलाड़ी एक दूसरे के पूरक हैं और किसी एक के बिना दूसरा अस्तित्व में नहीं रह सकता।
नजमुल ने यह भी स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों से यह नहीं पूछा जाएगा कि वे टूर्नामेंट में जाना चाहते हैं या नहीं। अंतिम टीम चयन बोर्ड करेगा और वही निर्णय मान्य होगा।
सरकारी हस्तक्षेप से इनकार
नजमुल ने यह भी कहा कि इस मामले में बांग्लादेश सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने बताया कि बोर्ड अपने फैसले खुद लेता है। केवल सुरक्षा अनुमति के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी होती है। इसके अलावा किसी तरह का सरकारी दबाव नहीं है और इस तरह की बातें केवल अटकलें हैं।
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