Ahmedabad World Cup Final Pitch Controversy Returns, Will India Avoid 2023 Mistake

उन्नीस नवंबर दो हजार तेइस का दर्द आज भी भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को याद है। अट्ठाईस महीने बाद भारतीय क्रिकेट टीम एक बार फिर अहमदाबाद में विश्व कप फाइनल खेलने जा रही है। इस बार फॉर्मेट और विरोधी टीम अलग है, लेकिन उस हार की याद अब भी लोगों के मन में ताजा है। भारत की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार को लेकर सबसे बड़ी शिकायत टीम के प्रदर्शन से नहीं थी। भारत ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाया था। न तो केएल राहुल की पारी को लेकर ज्यादा सवाल उठे और न ही ट्रैविस हेड की शानदार बल्लेबाजी पर। असली विवाद नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच को लेकर था।
पिच में बदलाव को लेकर उठे सवाल
राउंड रोबिन चरण में टीम इंडिया ने लगभग हर टीम को आसानी से हराया था, जिसमें ऑस्ट्रेलिया भी शामिल थी। सेमीफाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को भी शानदार तरीके से हराया था। लेकिन फाइनल से पहले पिच में बदलाव किए जाने की खबरें सामने आईं। कई रिपोर्टों में कहा गया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के कुछ अधिकारियों ने पिच में बदलाव करवाने के निर्देश दिए थे। जबकि कप्तान रोहित शर्मा और मुख्य कोच राहुल द्रविड़ ने ऐसी कोई मांग नहीं की थी।
फाइनल मुकाबले में पिच पर घास बिल्कुल नहीं थी और वह काफी सूखी नजर आ रही थी। भारतीय बल्लेबाजों को रन बनाने में मुश्किल हुई। गेंदबाजों ने शुरुआत में मौके बनाए, लेकिन ट्रैविस हेड की शानदार पारी और बाद में ओस की वजह से ऑस्ट्रेलिया को फायदा मिला और टीम आसानी से जीत की ओर बढ़ गई। मैच के बाद कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब भारत पूरे टूर्नामेंट में किसी भी परिस्थिति में जीत रहा था तो पिच के साथ छेड़छाड़ करने की जरूरत क्यों पड़ी।
मोहम्मद कैफ का बयान
पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने भी इस मामले में बड़ा बयान दिया था। वह उस समय कमेंट्री कर रहे थे और उन्होंने बताया कि पिच का रंग बदल गया था। घास काट दी गई थी और पिच पर पानी भी नहीं डाला गया था।
कैफ ने दो हजार चौबीस में एक इंटरव्यू में कहा कि वह तीन दिनों तक वहां मौजूद थे और उन्होंने खुद पिच में बदलाव होते देखा। उनके अनुसार भारत ऑस्ट्रेलिया को धीमी पिच देना चाहता था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के पास पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क जैसे तेज गेंदबाज थे। लेकिन यही रणनीति टीम के लिए उलटी पड़ गई।
उन्होंने यह भी कहा कि कई लोग कहते हैं कि पिच क्यूरेटर अपने हिसाब से काम करते हैं और टीम का उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं होता, लेकिन ऐसा नहीं है। घरेलू मैदान पर अक्सर टीम अपनी रणनीति के अनुसार पिच तैयार करवाने की कोशिश करती है।
विक्रम राठौर का अलग नजरिया
हालांकि भारत के पूर्व बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर ने इस बात से सहमति नहीं जताई। उनका कहना था कि टूर्नामेंट के पहले भी कई मैच धीमी पिचों पर खेले गए थे और अहमदाबाद की पिच भी वैसी ही थी। उनके अनुसार टीम मैनेजमेंट ने पिच को लेकर कोई विशेष अनुरोध नहीं किया था।
अब फिर वही मैदान और नई चुनौती
तीन साल बाद टीम इंडिया फिर उसी मैदान पर विश्व कप फाइनल खेलने के लिए तैयार है। इस बार टीम की कप्तानी सूर्यकुमार यादव कर रहे हैं और टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर हैं। लेकिन प्रशंसकों के मन में अब भी वही डर है।
दो हजार तेइस में भी लोग ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा नहीं डर रहे थे, लेकिन मैच का परिणाम पिच की वजह से प्रभावित हुआ। इस बार विरोधी टीम न्यूजीलैंड है। न्यूजीलैंड मजबूत टीम जरूर है, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में वह सबसे प्रभावशाली टीम नहीं रही है।
सेमीफाइनल में बाहर हुई दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड ने भी अच्छा प्रदर्शन किया था। न्यूजीलैंड को हल्के में नहीं लिया जा सकता, लेकिन असली चिंता पिच को लेकर है। कई बार देखा गया है कि भारतीय टीम सुरक्षित और संतुलित पिचों पर शानदार प्रदर्शन करती है।
इसलिए इस बार सबसे जरूरी बात यही है कि पिच के साथ किसी तरह का प्रयोग न किया जाए। बेहतर होगा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के दिशा निर्देशों के अनुसार ही पिच तैयार की जाए और टीम अपनी रणनीति, संयोजन और मैच योजनाओं पर ध्यान दे। अगर दो हजार तेइस जैसी गलती फिर से हुई तो टीम इंडिया के लिए ट्रॉफी जीतना मुश्किल हो सकता है।
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