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4 Most Embarrassing and Painful Defeats in Indian Cricket History

by Rohit G

भारतीय क्रिकेट का इतिहास गौरवशाली क्षणों, ऐतिहासिक जीतों और महान खिलाड़ियों से भरा हुआ है। लेकिन जिस खेल में इतनी दीवानगी हो, वहां कभी-कभी ऐसे दिन भी आते हैं जब पूरी टीम का प्रदर्शन फैंस को हैरान और मायूस कर देता है। भारतीय क्रिकेट इतिहास में कुछ ऐसी हार रही हैं, जिन्हें चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता।

आइए नज़र डालते हैं भारतीय क्रिकेट के उन 4 सबसे निराशाजनक और शर्मनाक मुकाबलों पर, जिन्होंने हर क्रिकेट प्रेमी का दिल तोड़ दिया था:

1. एडिलेड टेस्ट (2020) – केवल 36 रनों पर पूरी टीम ढेर

टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में यह भारत का सबसे न्यूनतम स्कोर है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में खेले गए डे-नाइट टेस्ट मैच की पहली पारी में बढ़त लेने के बाद भारतीय टीम बेहद मजबूत स्थिति में थी। लेकिन दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों (विशेषकर जोश हेजलवुड और पैट कमिंस) ने ऐसी तबाही मचाई कि भारत का कोई भी बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा  पार नहीं कर सका।

क्या हुआ था: भारत की पूरी पारी मात्र 36/9 पर सिमट गई (मोहम्मद शमी रिटायर्ड हर्ट हुए थे)।

शर्मनाक क्यों: दुनिया की सबसे मजबूत बैटिंग लाइन-अप ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। हालांकि, इस हार के बाद भारत ने ऐतिहासिक वापसी करते हुए वह सीरीज 2-1 से जीती थी।

2. चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल (2017) – पाकिस्तान से 180 रनों की करारी शिकस्त

भारत और पाकिस्तान का मैच हमेशा हाई-वोल्टेज होता है, और जब मुकाबला किसी आईसीसी (ICC) टूर्नामेंट के फाइनल का हो, तो दबाव दोगुना हो जाता है। 2017 चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत को खिताबी जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, क्योंकि लीग मैच में भारत ने पाकिस्तान को आसानी से हरा दिया था।  

क्या हुआ था: पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए फखर जमान के शतक की बदौलत 338 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में मोहम्मद आमिर की घातक गेंदबाजी के सामने भारत का टॉप ऑर्डर (रोहित, धवन, कोहली) सस्ते में निपट गया। पूरी भारतीय टीम सिर्फ 158 रनों पर ऑल-आउट हो गई।  

शर्मनाक क्यों: किसी बड़े आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में अपने सबसे बड़े चिर-प्रतिद्वंदी से 180 रनों के विशाल अंतर से हारना भारतीय फैंस के लिए बेहद दर्दनाक था।

3. आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप (2007) – बांग्लादेश से हार और पहले दौर से बाहर

2007 का वेस्टइंडीज वर्ल्ड कप भारतीय क्रिकेट के काले अध्यायों में से एक है। राहुल द्रविड़ की कप्तानी में सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, वीरेंद्र सहवाग, युवराज सिंह और एमएस धोनी जैसे दिग्गजों से सजी टीम इंडिया इस टूर्नामेंट को जीतने की बड़ी दावेदार थी।  

क्या हुआ था: ग्रुप स्टेज के पहले ही मैच में बांग्लादेश के गेंदबाजों ने भारत को सिर्फ 191 रनों पर रोक दिया। इसके बाद तमीम इकबाल, मुशफिकुर रहीम और शाकिब अल हसन के अर्धशतकों की मदद से बांग्लादेश ने यह मैच 5 विकेट से जीत लिया। इस हार के बाद श्रीलंका से मिली शिकस्त ने भारत को पहले दौर से ही बाहर कर दिया।

शर्मनाक क्यों: स्टार खिलाड़ियों से भरी टीम का एक युवा और कम अनुभवी बांग्लादेशी टीम से हारकर वर्ल्ड कप के पहले ही दौर से बाहर हो जाना बेहद अपमानजनक माना गया।

4. शारजाह (2000) – श्रीलंका के खिलाफ सिर्फ 54 रन

कोका-कोला चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ मिली यह हार वनडे क्रिकेट में भारत की सबसे खराब परफॉर्मेंस में से एक है।

क्या हुआ था: श्रीलंका के दिग्गज सनथ जयसूर्या ने 189 रनों की तूफानी पारी खेलकर अपनी टीम को 299 के स्कोर तक पहुंचाया। 300 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी सौरव गांगुली की कप्तानी वाली भारतीय टीम सिर्फ 54 रनों पर ऑल-आउट हो गई। भारत की तरफ से सिर्फ रॉबिन सिंह (11 रन) ही दहाई का आंकड़ा छू सके थे।  

शर्मनाक क्यों: पूरी टीम सिर्फ 26.3 ओवर खेल पाई और श्रीलंका ने यह मैच 245 रनों के बहुत बड़े अंतर से जीता।

खेल का सच: क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है। ये हार जितनी दर्दनाक थीं, उन्होंने भारतीय टीम को आत्ममंथन करने और मजबूत बनने का मौका भी दिया। आज की मजबूत टीम इंडिया इन्हीं कड़वे अनुभवों से सीखकर खड़ी हुई है।